अष्टविजय साधणारे प्रगतीचे विक्रमदित्य माजी कृषिमंत्री लोकनेते बाळासाहेब थोरात यांना वाढदिवसाच्या हार्दिक शुभेच्छा
ये अष्टविजय प्रगतीकी…
फिर बोलो,ये अष्टविजय प्रगतीकी…
हाँ भाई, सही सुना…
ये अष्टविजय प्रगतीकी…
आजकल के प्रचलित विकास से पहले,
इस संगमनेरी भूमि में बोई गई
ये अष्टविजय प्रगतीकी…
जन-मानस के अंतःकरण से उमड़ा
सहकार का वो सैलाब,
“आगे बढ़ो” कहता साहेब,
बोलता,ये अष्टविजय प्रगतीकी…
मन में संकल्प—हर घर, हर द्वार,
शिक्षा की गंगा, अमृत की धार,
पीढ़ियों को सींचती
ये अष्टविजय प्रगतीकी…
धर्म, कर्म, संस्कृति, परिवार
कसूम्बल में रँगे जीवन-सरोवर,
जहाँ विज्ञान का राजहंस विराजे,
Advertisementवहाँ गूंजे—ये अष्टविजय प्रगतीकी…
श्वेत क्रांति में मुस्काए किसान,
हरित क्रांति में लहराए खेत,
व्यापार निखरे, बाज़ार झिलमिलाए,
झूमे नगर ये अष्टविजय प्रगतीकी…
गणेश, शारदा, लक्ष्मी वहीं विराजें,
जहाँ जनसेवा की समाधि सजें,
यशोधन कहीं नहीं, सेवा ही धन
कहती ये अष्टविजय प्रगतीकी…
हर्षलता से सुधीर,
मन में सत्यजित का उजास,
सेवा हर संगमनेरी की शपथ,
दुर्गावचन, शरयू-धार, जयश्री का विश्वास—
एक ही स्वर में बोले
ये अष्टविजय प्रगतीकी…
ये अष्टविजय प्रगतीकी…
.…शुभेच्छुक
. मार्कंडेय प्रकाशन



